नमस्ते ! संवाद की निवं
कहाणी नः 3 बर्फ की फॅक्टरी

कहाणी बढीं रोचक है
एक बडी सी बर्फ बनाने वाली फॅक्टरी थी. वहां एक साधारण आदमी काम पर लग लगा. रोज सुबह काम पर जाता था, और श्याम को लौट आता था. लेकीन वह आते जाते चेक ईन चेक आऊट करनेवाले सुरक्षा रक्षक को नमस्ते करता था. ऐसे में उनकी खास पहचान नही थी. लेकीन एक दुसरों को जरुर ध्यान में रखने लगे थे. . रोज की ये आदत हो गयी थी. बाकी कुछ संवाद नही, ना कुछ बाते होती थी. बस आते जाते वह नमस्कार करता था.
एक दिन श्याम को कंपनी का भोंगा बज गया. काम करने वाले सारे घर जाने लगे. अब कोई बाहर आने की संभावना बची नही थी. लेकीन सुरक्षा रक्षक को कुछ खाली पन लगा. कुछ छुट गया ऐसा लगता था. उसने याद किया की रोज हमे नमस्ते करने वाला आदमी कंपनी से बाहर आया ही नही है. . उन्होंनो थोडा याद किया. हां सुबह तो कंपनी में एन्ट्री किया था. लेकीन नमस्ते वाला आदमी बाहर क्यूं नही आया ?. उन्होंनो कंपनी में जाकर उन्हे खोज ने तयारी की. किसी फिजर डिपार्ममेंटमें कुछ आवाज आयी. आवाज की तरफ दौडा तो वह नमस्ते वाला आदमी अंदर फंसा था. दरवाजा खोल नही पा रहा था.
सुरक्षा रक्षक ने दरवाजा बाहर से खोला और उसे बाहर निकाला. सुरक्षा रक्षक अगर वहां नही आता तो वहं रातभर में उनका बर्फ बन जाता और मर जाता. सुरक्षा रक्षक ने उनकी जान बचा ली थी.
ये क्यूं संभव हुआ, क्या सुरक्षा रक्षक का वहां पहुंचना दैवी संकेत था या आपस में सिर्फ नमस्ते करने की एक संवाद की आदत ने नमस्ते करनेवाले व्यक्ति की जान बचायी थी.
सोचो, संवाद की ताकद क्या होती है.
हमारे साथ जुडों, सिखो, सिखाते रहो, उगाते रहो, और स्वस्थ रहो.
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