मौल्यवान पत्थर कहाणीः 1

रोचक कहाणीः नकुले पत्थर

कहाणी नं. १ : मौल्यवान पत्थर

एक कहांनी है. बडी रोचक है.

कुछ यात्री जिवन की अनजान सफर पर निकलते है. जाते जाते आजू बाजू के प्रकृती, पर्वत, पहाड, नदी., नालों का सौंदर्य देखते जा रहे थे. रास्ते में उन्हे एक बडा सा पर्वत दिखायी दिया. पर्वत को पार किए बिना जा नही सकते थे. उसके अलावा कोई चारा भी नही था, क्योंकी एक बाजू खाई थी तो दुसरे बाजू पाणी का सागर, उस महाकाय पर्वत को पार करना ही था, कोई विकल्प नही था. सारे परेशान हो गये. ये पर्वत चढेंगे कब और उतरेंगे कब?

लेकीन जैसे जैसे वो पर्वत के पास जाने लगे उन्हे रास्ता दिखने लगा. रास्ता छोटा था एक समय एक ही आदमी जा सकता था. सब चलने लगे. पर्वत के पास आते ही उन्हे एक बोगदा (टनेल) दिखायी दिया. घना अंधेरा था, किसी को कुछ पता नही था, जाना तो था ही. लोग चलने लगे. कुछ दुर चलने के बाद पता चला की वहां पर जमीन के उपर कुछ नुकिलासा बिझा हुआ था. शायद पत्थर के तुकडे होगे. पावं पडते ही वो बजने लगते थे. कंही पावं आडा तिरछा पड गया तो पत्थर के तुकडे ज्यादा ही चुब जाते थे. लोग चलते रहे.

कुछ देर बाद उन्हे रोशनी की किरण दिखायी दी. सब धिरे धिरे बाहर आ गये. अंधेरे से डरे सहेमे थे. पानी वैगरा पि लिया. सारी चर्चा हो गयी. फिर एक आदमी ने अपने खिसे में हात डाला और देखा तो क्या …

देखा तो उनके हाथों में हिरे थे. अब सबके ध्यान में आया की हम जिस रास्ते पर चल रहे थे वो हिरो की खदान थी. बस हम कोसते रहे. एक के सिवा किसिके ध्यान में नही आया की ये चुबने वाली चिंज आखीर है क्या?
जिनके मन में प्रश्न आया ?. उत्सुकता जागी, उन्होेने चार पत्थर उठा लिया. वह आदमी उस काबिले में अब सबसे अमिर आदमी बना, काबिले का मार्गदर्शक बना. बाकी दर्शक बने रहे.

अब पिछे तो जा नही सकते थे, क्यों की समय निकलता जा रहा था, अंधेरे से पहेले अपने निश्चित जगहं पहुचना भी था. पछताने के बिना अब हाथ में था ही क्या. तो खैर..
हमेशा सिखते रहो. अपनी उत्सुकता को जिंदा रखो, हमारे सामने आने वाली हर संधी न जाने जिवन में कोई बडी उपलब्धी लेके आएंगी पता नही. हमारे साथ जुडों, सिखो, सिखाते रहो, उगाते रहो, और स्वस्थ रहो.


*संदीप चव्हाण, ग्रो ऑरगॅनिक, ग्रीन बिझिनेस कंन्सल्टंट न् कोच*
*महत्वपूर्ण website*
https://linktr.ee/gacchivarchi_baug

🍀*course details link*🍀
https://www.groworganic.club/n2vhxa6o

समझदारों को उपरी कथा ही काफी है. बाकी तो दर्शक के दर्शक ही बने रहे जाएंगे. डरे हुए अपनें खुद को या दुसरों को कोसते हुएं.
आप कौन हो, दर्शक या मार्गदर्शक..


Discover more from Grow Organic

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Discover more from Grow Organic

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Discover more from Grow Organic

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Organic Farming & Gardening Coach in India Earth is like (English) Importance of Home grown (Hindi) Importance of Gardening (English)
10 OxyGen Plants